7 Nurses Suspended by SKIMS

तमिलनाडु में कोरोना के समय कई नर्सो को अस्थायी रूप से एक कॉन्ट्रेक्ट के जरिये भर्ती किया गया था। इसके अलावा उन्हें जल्द ही स्थायी किये जाने की घोषणा भी की गई थी, लेकिन जब इन कॉन्ट्रेक्ट नर्सेज को लम्बे समय बाद भी स्थायी नर्स घोषित नही किया गया तो उन्होंने हड़ताल का सहारा लिया और भूख हड़ताल की शुरुआत कर दी।

यह है मामला:

पिछले साल जब कोरोना महामारी अपने चरम पर थी, तब तमिलनाडु की सरकार ने अस्पताल में होने वाली नर्सेज की कमी को दूर करने के लिये लगभग 3000 नर्सेज को मई में एक कॉन्ट्रेक्ट के जरिये भर्ती करने की योजना बनाई। जिसके तहत राज्य में लगभग 3000 नर्सेज ने सरकारी अस्पतालों में नर्सिंग सेवा देना शुरू किया। साथ ही एक घोषणा में उन सभी नर्सेज को जल्द ही स्थाई सरकारी स्टाफ नर्स बनाने की बात कही।

कॉन्ट्रेक्ट के जरिये शामिल होने वाली नर्सेज वे स्टूडेंट्स थे, जिन्होंने अपनी नर्सिंग की शिक्षा पूरी कर स्टाफ नर्स भर्ती परीक्षा को भी उत्तीर्ण किया था। लेकिन जब कॉन्ट्रेक्ट जारी होने के 6 माह बाद भी इन नर्सेज को स्थाई नही किया गया तो उनकी नाराजगी ने भूख हड़ताल का रूप ले लिया। 

सभी नर्सेज ने उनकी सेवा को स्थाई व सरकारी करने की मांग उठाई और हड़ताल शुरू कर दी। इससे पहले उन्होंने DMS परिसर का रुख कर वहाँ भी अपनी समस्या बतलाई। लेकिन जब उनकी मांगों को वहाँ हल्के में लिया गया तो उन्होंने भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा की। 

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इस सम्बन्द्ध में वहाँ की नर्सो ने बताया कि वे सभी अपनी पढ़ाई पूरी कर चुके थे और स्टाफ भर्ती परीक्षा का भी हिस्सा बने थे। इसके बाद उन सभी का नाम एक वेटिंग लिस्ट में जारी किया गया था। लेकिन महामारी के समय मे जब उन्हें सीधे ही काम शुरू करने को कहा गया, तो उन्होंने अपनी पूरी ईमानदारी के साथ अपना कार्य किया। लेकिन अब जब वह सभी 6 माह से भी अधिक समय से अपना काम कर रहे है तो उन्हें स्थाई कर सरकारी स्टाफ नर्स घोषित कर दिया जाना चाहिये था लेकिन ऐसा ना होने पर उन्हें मजबूरन हड़ताल शुरू करनी पड़ी।